Svabhavokti Alankar in Hindi Grammar | स्वभावोक्ति अलंकार

स्वभावोक्ति अलंकार (Svabhavokti Alankar)

जो वस्तु जैसी हो उसका ठीक-ठीक वैसा ही वर्णन स्वभावोक्ति

अलंकार कहलाता है । इस वर्णन को पढ़ते या सुनते ही पाठक या श्रोता के समक्ष वर्णित वस्तु साकार उपस्थित हो जाती है । उदाहरण–

सीस … Read More

Virodhabhas Alankar in Hindi Grammar | विरोधाभास अलंकार

Virodhabhas Alankar (विरोधाभास अलंकार)

जिस वर्णन में वस्तुत: विरोध न रहने पर भी विरोध का आभास हो, उसमें विरोधाभास अलंकार होता है । उदाहरण-

‘आग हूँ जिससे ढूलकते बिन्दु हिमजल के ।
शून्य हूँ जिसमें बिछे हैं पाँवड़े पलकें ।’… Read More

Kavyaling Alankar in Hindi Grammar | काव्यलिंग अलंकार

Kavyaling Alankar (काव्यलिंग अलंकार)

काव्य में किसी बात को सिद्ध करने के लिए जहाँ युक्ति अथवा कारण का कथन करके उसका समर्थन किया जाय, वहाँ काव्यलिंग अलंकार होता है ।

उदाहरण-

‘मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोय ।
जा … Read More

Ullekh Alankar in Hindi Grammar | उल्लेख अलंकार

Ullekh Alankar (उल्लेख अलंकार)

जहाँ किसी एक वस्तु को अनेक रूपों में ग्रहण किया जाय, तो उसके इस प्रकार अनेक रूपों में कथन को उल्लेख कहा जायेगा । एक वस्तु का, ज्ञाताओं के भेद के कारण अथवा विषयभेद के कारण, … Read More

Athantarnyas Alankar in Hindi Grammar | अथांन्तरन्यास अलंकार

Athantarnyas Alankar (अथांन्तरन्यास अलंकार)


इस अलंकार में साधम्र्य और वैधम्र्य की दृष्टि से सामान्य का विशेष द्वारा और विशेष का सामान्य द्वारा समर्थन किया जाता है । अर्थात् कारण से कार्य का तथा कार्य से कारण का जहाँ समर्थन हो, … Read More