Samas Vigraha – Dvitiya Tatpurush – (द्वितीया तत्पुरुष – समास विग्रह)

द्वितीया तत्पुरुष:

पद विग्रह
अग्निभक्षी अग्नि को भक्षण करनेवाला
कष्टसहिष्णु कष्ट को सह लेने वाला
कठफोड़वा काठ को फोड़ने वाला
कठखोदवा काठ को खोदने वाला
कुम्भकार कुम्भ को बनाने वाला
गगनचुम्बी गगन को चूमने वाला
गिरहकट गिरह को काटने वाला
गिरिधर गिरि को जो धारण करता है
गृहगत गृह को आहत

Samas Vigraha – Avyayi Bhav (अव्ययीभाव समास विग्रह)

अव्ययी भाव:

पद विग्रह
अनुकूल कुल के अनुसार (मन के मुताबिक)
अनुरूप रूप के समान
अभ्यागत अभि आगत
आकंठ आा कठ (वर्कठ तक)
आजन्म आ जन्म (जन्म से लेकर)
आजीवन आ जीवन (जीवन भर)
आमरण आ मरण (मरणापर्यंत)
आसमुद्र आ समुद्र (समुद्र तक)
आपादमस्तक पाद (पैर) से मस्तक तक
अकारण बिना कारण के
अभूतपूर्व जो पूर्व नहीं भूत (हुआ) है
अनजाने बिना जाने हुए
अनुगुण गुण के योग्य
आजानु घुटना (जानु) तक
खंड-खंड एक खंड से दूसरा खंड
उपकूल कूल के समीप
उपगृह गृह के निकट
एकाएक एक-ब-एक
घड़ी-घड़ी घडी के बाद घडी
घर-घर एक घर से दूसरा घर
दिनानुदिन दिन-प्रतिदिन
धीरे-धीरे धीरे के बाद भी धीरे
धड़ा – धड़ जल्दी से
निर्विकार बिना विकार के
निर्विवाद बिना विवाद के
निधड़क बिना धडक के
निर्भय बिना भय के
परोक्ष अक्षि (ऑख) से परे
प्रत्यक्ष अक्षि के आगे
प्रतिमास हर मास
प्रत्येक हर एक, एक-एक
प्रत्यंग हर अंग
प्रत्यूपकार उपकार के प्रति
प्रतिदिन हर दिन या दिन-दिन
प्रतिपल हर पल, पल-पल
प्रतिबार हर बार
बेकाम बिना काम का
बीचोबीच ठीक बीच में
बेखटके बिना खटके के
बखूबी खूबी के साथ
बेकायदा बिना कायदे के
बेरहम बिना रहम के
बेफायदा बिना फायदा के
बरम बार बार बार
भरपेट पेट भरकर
भरसक शक्ति भर
मनमाना मन के अनुसार
यथारूचि रूचि के अनुसार
यथाक्रम क्रम के अनुसार
यथास्थान स्थान के अनुसार
यथाशक्ति शक्ति के अनुसार
यथासमय समय के अनुसार
यथाशीघ्र जितना शीघ्र हो
यथासंभव जितना संभव हो
समक्ष अक्षि के सामने (आँख के सामने)
सरासर एकदम से
सापेक्ष अपेक्षा सहित
साफ साफ बिकुल साफ
हाथो हाथ एक हाथ से दुसरे हाथ
हर घड़ी घड़ी घड़ी
हर रोज हर रोज

Vachya Aur Vachya ke Bhed Hindi Grammar – वाच्य एवं वाच्य के भेद

वाच्य (Vachya) :

वाच्य क्रिया का वह रूप है, जिससे यह ज्ञात होता है कि वाक्य में कर्ता प्रधान है या कर्म अथवा भाव।
क्रिया के लिंग एवं वचन उसी के अनुरूप होते हैं।




खंड (अ) खंड (ब)
(क) राम विद्यालय जाता है। (क) राम द्वारा विद्यालय जाया जाता है।
(ख) गरिमा पत्र लिखती है। (ख) गरिमा द्वारा पत्र लिखा जाता है।
(ग) वह जोर से हँसता है। (ग) उससे जोर से हँसा जाता है।
(घ) चलो, चलें। (घ) चलो, चला जाए।

खंड (अ) के सभी वाक्यों में कर्ता प्रमुख है और क्रिया के लिंग एवं वचन उसी कर्ता के अनुसार हैं।
खंड (ब) के (क) और (ख) वाक्यों में कर्म प्रमुख है और क्रिया के लिंग एवं वचन उसी कर्म के अनुसार हैं।
जबकि वाक्य (ग) और (घ) में भावों की प्रधानता है।
अत: किसी वाक्य में कर्ता, क्रिया या भावों के अनुसार क्रिया का लिंग, वचन, एवं पुरुष होना ही वाच्य कहलाता है.

वाच्य के भेद – Vachaya ke Bhed




(1) कर्तृवाच्य
(2) कर्मवाच्य तथा
(3) भाववाच्य

(1) कर्तृवाच्य: (Kartri Vachya)
कर्तृवाच्य का मुख्य बिंदु कर्ता होता है। क्रिया के लिंग तथा वचन कर्ता के लिंग और वचन के अनुसार ही होते हैं।
(क) माली पौधों को सींच रहा है।
(ख) मजदूर इमारत बना रहे हैं।
इन वाक्यों में क्रियाएँ कर्ता के अनुसार हैं। वाक्य (क) में ‘माली” (कर्ता) एकवचन पुंलिंग है। वाक्य (ख) में ‘मजदूर’ (कर्ता) बहुवचन पुंलिंग है। दोनो वाक्यों में क्रिया भी कर्ता के लिंग और वचन के अनुसार है।
कर्तवाच्य में अकर्मक एवं सकर्मक दोनों प्रकार की क्रियाओं का प्रयोग होता है; जैसे-
(क) मोहन पुस्तक पढ़ता है। (सकर्मक)
(ख) कमला हँस रही है। (अकर्मक)

(2) कर्मवाच्य: (Karm Vachya)
(क) मोहिनी द्वारा पौधों को सींचा जा रहा है।
(ख) मजदूरों द्वारा इमारत बनाई जा रही है।
उपर्युक्त वाक्यों में क्रियाओं के लिंग एवं वचन कर्ता के अनुसार न होकर कर्म के अनुसार हैं।
(क) वाक्य में पौधे (ख) वाक्य में इमारत कर्म के रूप में प्रयुक्त हुए हैं। अत: कर्मवाच्य का मुख्य बिंदु कर्म होता है। क्रिया के लिंग एवं वचन कर्म के लिंग एवं वचन के अनुसार होते हैं।

क्रिया का कर्ता अज्ञात होने पर- (क) मोहन को बुलाया गया होगा। (ख) बात कही गई।
सुझाव देने के लिए – (क)सबूत इकट्ठे किए जाएँ। (ख) चोर का पता लगाया जाए।
कानूनी भाषा का प्रयोग करते हुए – (क) गवाह को पेश किया जाए। (ख) आपको सूचित किया जाता है कि
किसी कार्य को करने में असमर्थता दिखाने के लिए – (क) मुझसे चला नहीं जाता। (ख) उससे देखा नहीं जाता।
अचानक किसी क्रिया के घटित होने पर – (क) उसका दिल टूट गया। (ख) यह क्या हो गया।

(3) भाववाच्य: (Bhav Vachya)
(क) मुझसे चला नहीं जाता। (ख) अब चला जाए।
उपर्युक्त वाक्यों में भावों की प्रधानता है; अकर्मक क्रिया का प्रयोग किया गया है जो अन्य पुरुष एकवचन, पुंलिंग है। अत: भाववाच्य में भावों की प्रधानता होने के कारण अकर्मक क्रियाओं का प्रयोग होता है, जो सदैव अन्य पुरुष, एकवचन एवं पुंलिंग होती है। भाववाच्य का प्रयोग कभी-कभी कर्ता के बिना भी किया जाता है; जैसे (क) गर्मी के मारे सोया नहीं जाता। (ख) अब चला जाए।




वाच्य परिवर्तन – Vachya Parivartan
1. कतृवाच्य से कर्मवाच्य में :
(i) कर्ता के बाद- ‘से’, ‘के द्वारा’ अथवा ‘द्वारा’ जोड़ना चाहिए।
(ii) क्रियापद में ‘या’ प्रत्यय जोड़कर ‘जा’ धातु को कर्म के लिंग तथा वचन के अनुसार प्रयोग करना चाहिए।
(iii) कर्म के साथ लगी विभक्ति (कारक-चिह्न) हटा देनी चाहिए।

कतृवाच्य कर्मवाच्य
(1) अमन चिट्ठी पढ़ता है। अमन द्वारा चिट्ठी पढ़ी जाती है।
(2) राम फूल तोड़ता है। राम द्वारा फूल तोड़े जाते हैं।
(3) मैंने पत्र लिखा। मेरे द्वारा पत्र लिखा गया।
(4) सिपाही ने चोर को पकड़ा। सिपाही द्वारा चोर पकडा गया।

 

2. कतृवाच्य से भाववाच्य में :
(i) भाववाच्य केवल अकर्मक क्रियाओं द्वारा बनाए जाते हैं।
(ii) कर्ता के बाद ‘से’, ‘द्वारा’, ‘के द्वारा’ परसर्ग (कारक-चिह्न) जोड़े जाते हैं।
(iii) ‘जा’ धातु के क्रिया के रूपों को क्रिया के काल के अनुसार जोड़ा जाता है।

कतृवाच्य भाववाच्या
(1) मैं नहीं सोता। मुझसे सोया नहीं जाता।
(2) राजू तेज दौड़ता है। राजू से तेज दौड़ा जाता है।
(3) मैं बैठ नहीं सकता। मुझसे बैठा नहीं जाता।
(4) भगवान रक्षा करता है। भगवान द्वारा रक्षा की जाती है।

 




Apurn Kriya in Hindi Grammar (अपूर्ण क्रिया)

अपूर्ण क्रिया (Apurn Kriya)

जिस क्रिया से इच्छित अर्थ नहीं निकलता, उसे अपूर्ण क्रिया कहते हैं। इसके दो भेद हैं- (1) अपूर्ण अकर्मक क्रिया तथा (2) अपूर्ण सकर्मक क्रिया ।




(a) अपूर्ण अकर्मक क्रिया कतिपय अकर्मक क्रियाएँ कभी-कभी अकेले कर्ता से स्पष्ट नहीं होतीं । इनके अर्थ को स्पष्ट करने के लिए इनके साथ कोई संज्ञा या विशेषण पूरक के रूप में लगाना पड़ता है। ऐसी क्रियाओं को अपूर्ण अकर्मक क्रिया कहते हैं। जैसे – वह बीमार रहा । इस वाक्य में बीमार पूरक है।
(b) अपूर्ण सकर्मक क्रिया-कुछ संकर्मक क्रियाओं का अर्थ कर्ता और कर्म के रहने पर भी स्पष्ट नहीं होता । इनके अर्थ को स्पष्ट करने के लिए इनके साथ कोई संज्ञा या विशेषण पूरक के रूप में लगाना पडता है । ऐसी क्रियाओं को अपूर्ण सकर्मक क्रिया कहा जाता है ।
जैसे-आपने उसे महान् बनाया । इस वाक्य में ‘महान् पूरक है

क्रिया एवं क्रिया के भेद (Kriya in Hindi Grammar, Kriya ke bhed in Hindi Grammar)

Vidhi Kriya in Hindi Grammar (विधि क्रिया)

विधि क्रिया (Vidhi Kriya)

जिस क्रिया से किसी प्रकार की आज्ञा का ज्ञान हो, उसे विधि क्रिया कहते हैं । जैसे-घर जाओ । ठहर जा।




क्रिया एवं क्रिया के भेद (Kriya in Hindi Grammar, Kriya ke bhed in Hindi Grammar)