Athantarnyas Alankar (अथांन्तरन्यास अलंकार)


इस अलंकार में साधम्र्य और वैधम्र्य की दृष्टि से सामान्य का विशेष द्वारा और विशेष का सामान्य द्वारा समर्थन किया जाता है । अर्थात् कारण से कार्य का तथा कार्य से कारण का जहाँ समर्थन हो, वहाँ अथांन्तरन्यास अलंकार होता है । उदाहरण-

‘रहिमन नीच कुसंग सों, लगत कलंक न काहि ।
दूध कलारी कर लखै, को मद जाने नाहि ।’

यहाँ सामान्य (नीच कुसंग) का ‘दूध कलारी’ के विशेष प्रसंग से समर्थन है और ‘लगत’ तथा ‘जाने’ दोनों क्रियाएँ साधम्र्य से कही गयी हैं ।

हिंदी व्याकरण | संज्ञा | सर्वनाम | विशेषण | क्रिया | क्रियाविशेषण | वाच्य | अव्यय | लिंग | वचन | कारक | काल | उपसर्ग | प्रत्यय | समास | संधि | पुनरुक्ति | शब्द विचार | पर्यायवाची शब्द | अनेक शब्दों के लिए एक शब्द | हिंदी कहावत | हिंदी मुहावरे | अलंकार | छंद | रस

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *