Kavyaling Alankar in Hindi Grammar | काव्यलिंग अलंकार

Kavyaling Alankar (काव्यलिंग अलंकार)

काव्य में किसी बात को सिद्ध करने के लिए जहाँ युक्ति अथवा कारण का कथन करके उसका समर्थन किया जाय, वहाँ काव्यलिंग अलंकार होता है ।

उदाहरण-

‘मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोय ।
जा तन की झाँई परै, स्याम हरित दुति होय ।’

यहाँ प्रशंसा की समर्थता का कारण दूसरे वाक्य में कहा गया है ।

‘स्याम गौर किमि कहीं बखानी । गिरा अनयन नयन बिनु बानी ॥”

इसमें पूर्वाद्ध का समर्थन उत्तरार्द्ध के वाक्यार्थ में प्रस्तुत युक्ति के द्वारा किया गया है।

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