Shlesh Alankar (श्लेष अलंकार)

जब श्लिष्ट शब्दों से अनेक अर्थों का बोध होता है, तब वहाँ श्लेष अलंकार होता है । ‘श्लिष्ट’ शब्द का अर्थ है मिला हुआ, चिपका हुआ या सटा हुआ । अत: श्लिष्ट शब्द का सामान्य अर्थ होता है ऐसा शब्द, जिसमें अनेक अर्थ मिले हुए या चिपके हुए हों।

उदाहरण-

‘रहिमन’ पानी राखिये बिन पानी सब सून।
पानी गये न उबरे, मोती, मानुस, चून ।

यहाँ एक ही शब्द ‘पानी’ का चमक, प्रतिष्ठा और जल- ये तीन अर्थ हैं, जिनका तम्बन्ध क्रमश: मोती, मनुष्य और चूना से होता है । अत: इस दोहा में श्लेष अलंकार है।

जो चाहो चटक न घटै, मैलो होय न मित्त ।
रज राजस न छुवाइये, नेह चीकने चित्त ।।

यहाँ ‘रज’ रजोगुण (अहंकार) तथा धूल और ‘नेह’ प्रेम (स्नेह) तथा तेल (स्निग्ध द्रव्य)- ये दो-दो अर्थ देते हैं । अत: यहाँ भी श्लेष अलंकार है ।

हिंदी व्याकरण | संज्ञा | सर्वनाम | विशेषण | क्रिया | क्रियाविशेषण | वाच्य | अव्यय | लिंग | वचन | कारक | काल | उपसर्ग | प्रत्यय | समास | संधि | पुनरुक्ति | शब्द विचार | पर्यायवाची शब्द | अनेक शब्दों के लिए एक शब्द | हिंदी कहावत | हिंदी मुहावरे | अलंकार | छंद | रस

English Grammar | Parts of Speech | Noun | Pronoun | Adjectives | Verb | Adverb | Preposition | Conjunction | Interjection | Tenses | Phrases | Clauses |

6 Comments on Shlesh Alankar in Hindi Grammar | श्लेष अलंकार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *