Upma Alankar (उपमा अलंकार)

दो भिन्न पदार्थों में सादृश्य-प्रतिपादन को उपमा कहते हैं । ‘उपमा’ का अर्थ है एक वस्तु के निकट दूसरी वस्तु को रखकर दोनों में समानता प्रतिपादित करना । ‘उपमा’ शब्द का अर्थ ही है सादृश्य, समानता तथा तुल्यता इत्यादि । अलंकार के सौन्दर्य का मूल सादृश्य में है, और यही कारण है कि सादृश्यमूलक अलंकार ही प्रधान हैं । ‘उपमा’ इन समस्त सादृश्यमूलक अलंकारों का भी प्राण है, क्योंकि यह स्वत: सादृश्य है । उपमा अलंकार सर्वाधिक प्राचीन है । इसका प्रयोग ऋग्वेद में भी मिलता है ।

‘उपमा” अलंकार (Upma Alankar) के चार अंग होते हैं –

एक वाक्य है- ‘मुख चन्द्रमा-सा सुन्दर है ।’ इस वाक्य में ‘मुख’ की उपमा ‘चन्द्रमा’ से दी गयी है, अत: यह वाक्य उपमा अलंकर का उदाहरण है । इस वाक्य में ‘मुख’ की सुन्दरता की तुलना ‘चन्द्रमा’ की सुन्दरता से की गयी है, अत: ‘मुख’ ‘उपमेय’ है, ‘चन्द्रमा’ ‘उपमान’ है, ‘सा’ सादृश्यवाचक है तथा ‘सुन्दर’ साधम्र्य या समान गुण-धर्म है, जो उपमेय (मुख) तथा उपमान (चन्द्रमा) दोनों में समान रूप से विद्यमान है। इस प्रकार हम देखते हैं कि उपमेय, उपमान, सादृश्यवाचक तथा साधारण धर्म (या समान गुण-धर्म)-ये उपमा अलंकार के चार अंग हैं।

उपमेय अलंकार (Upmey Alankar) उपमेय का अर्थ है “उपमा देने के योग्य’-जिसकी समानता किसी दूसरी वस्तु से दिखायी जाय । ऊपर के उदाहरण में ‘मुख’ उपमेय है ।

उपमान अलंकार (Upman Alankar)  उपमेय की उपमा जिससे दी जाती है-उपमेय को जिसके समान बताया या दिखाया जाता है, उसे उंपमान कहते हैं । उपर्युक्त उदाहरण में ‘चन्द्रमा’ उपमान है ।

सादृश्यवाचक अलंकार (Sadrishyavachak Alankar)  उपमेय और उपमान में समानता बताने या दिखाने के लिए जिस शब्द का प्रयोग किया जाता है, उसे सादृश्यवाचक कहते हैं । उपर्युक्त उदाहरण में ‘सा’ सादृश्यवाचक है। आवश्यकतानुसार सा, ऐसा, जैसा, सदृश, समान, तुल्य इत्यादि में से किसी भी शब्द का प्रयोग सादृश्यवाचक के लिए किया जा सकता है ।

साधारण धर्म (समान गुण-धर्म) अलंकार (Sadharan Dharm Alankar)  दो वस्तुओं के बीच में समानता प्रतिपादित करने के लिए किसी ऐसे गुण या धर्म की सहायता ली जाती है, जो दोनों में वर्तमान हो । इसी गुण या धर्म को साधारण धर्म (या समान गुण-धर्म) कहा जाता है । पूर्वोक्त उदाहरण में ‘सुन्दर’ साधारण धर्म है ।

उपमा” अलंकार के दो प्रमुख भेद हैं-

(1) पूर्णोपमा अलंकार (Purnotma Alankar) तथा
(2) लुप्तोपमा अलंकार (Luptotma Alankar)

( 1 ) पूर्णोपमा अलंकार (Purnotma Alankar) जब उपमा के चारों अंगों का शब्दत: उल्लेख हो, तब पूर्णापमा होती है । ‘मुख चन्द्रमा-सा सुन्दर है’ में पूणोपमा है, क्योंकि इसमें उपमा के चारों अंगों उपमेय (मुख), उपमान (चन्द्रमा), साधारण धर्म (सुन्दर) तथा सादृश्यवाचक (सा) का शब्दत: कथन है ।

निम्नलिखित उदाहरणों में भी पूर्णापमा है-

(i) सुनि सुरसरि सम पावन बानी ।
भई सनेह विकल सब रानी ।

(ii) राम-चरन-पंकज मन जासू ।
लुबुध मधुप इव तजै न पासू ।

(2) लुप्तोपमा अलंकार (Luptotma Alankar) जहाँ उपमा के चारों अंगों में से किसी एक (या अधिक) का शब्दत: कथन नहीं किया जाता, वहाँ लुप्तोपमा अलंकार होता है ।

उदाहरण- ‘सरद विमल बिधु बदन सुहावन ।’

इसमें सादृश्यवाचक का कथन नहीं किया गया है ।

या, ‘दोनों भैया मुखराशि हमें लौट आके दिखाओ।” (प्रियप्रवास-हरिऔध)

इसमें ‘वाचक’ तथा ‘ धर्म’ का कथन नहीं किया गया है, साथ ही उपमेय के धर्म की प्रधानता होने के कारण यहाँ ‘रूपक” नहीं माना जायेगा। ‘दिखाओ’ शब्द मुख की प्रधानता सिद्ध करता है। अत: इस पद में ‘वाचक-धर्मलुप्ता उपमा है।

हिंदी व्याकरण | संज्ञा | सर्वनाम | विशेषण | क्रिया | क्रियाविशेषण | वाच्य | अव्यय | लिंग | वचन | कारक | काल | उपसर्ग | प्रत्यय | समास | संधि | पुनरुक्ति | शब्द विचार | पर्यायवाची शब्द | अनेक शब्दों के लिए एक शब्द | हिंदी कहावत | हिंदी मुहावरे | अलंकार | छंद | रस

English Grammar | Parts of Speech | Noun | Pronoun | Adjectives | Verb | Adverb | Preposition | Conjunction | Interjection | Tenses | Phrases | Clauses |

3 Comments on Upma Alankar in Hindi Grammar | उपमा अलंकार

  1. Very good 😊 work. For improving Hindi grammar this site is very good.thanks for working in Hindi grammar …..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *