Vipsa Alankar (वीप्सा अलंकार)

आदर, घृणा, हर्ष, शोक, विस्मयादिबोधक भावों को प्रभावशाली रूप से व्यक्त करने के लिए शब्दों की पुनरावृत्ति को वीप्सा अलंकार कहते हैं।

उदाहरण :

‘रीझि -रीझि रहसि-रहसि हँसी-हँसी उठे,
साँसै भरि आँसू भरि कहत दई-दई ।

मोहि–मोहि मोहन को मन भयो राधामय
राधा मन मोहि-मोहि मोहन मयी-मयी । (देव)

या, मधुर-मधुर मेरे दीपक जल । (महादेवी)

मधुर-मधुर की आवृत्ति में वीप्सा अलंकार है । पहले छन्द सभी शब्द वीप्सा अलंकार के ही उदाहरण हैं ।

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