Virodhabhas Alankar (विरोधाभास अलंकार)

जिस वर्णन में वस्तुत: विरोध न रहने पर भी विरोध का आभास हो, उसमें विरोधाभास अलंकार होता है । उदाहरण-

‘आग हूँ जिससे ढूलकते बिन्दु हिमजल के ।
शून्य हूँ जिसमें बिछे हैं पाँवड़े पलकें ।’

‘आग’ से हिमजल बिन्दु का ढूलकना तथा ‘शून्य’ में पलक-पाँवड़ों का बिछना दोनों में विरोधाभास है ।

‘पर अथाह पानी रखता है यह सूखा-सा गात्र ।’
यहाँ ‘सूखे-से गात्र का अथाह पानी रखना’ विरोध का सूचक है, अत: यहाँ विरोधाभास है।

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