Yamak Alankar in Hindi Grammar | यमक अलंकार

यमक अलंकार (Yamak Alankar)

सार्थक परन्तु भिन्न अर्थ का बोध करानेवाले शब्द की क्रमश: आवृत्ति को यमक कहते हैं । यमक शब्द का अर्थ है दो । अत: इस अलंकार में एक ही शब्द का कम-से-कम दो बार प्रयोग आवश्यक है । यह प्रयोग दो बार से अधिक भी हो सकता है।

उदाहरण-
(1 ) कनक कनक ते सौगुनी मादकता अधिकाई ।
उहि खाये बौरात नर, इह पाये बौराई ।

इस दोहा में एक ‘कनक’ का अर्थ ‘सोना’ है, तो दूसरे ‘कनक’ का अर्थ ‘ धतूरा’ ।

(2) उधौ जोग जोग हम नाहीं । – इस पंक्ति में पहले ‘जोग’ का अर्थ ‘योग’ तथा दूसरे ‘जोग’ का अर्थ ‘योग्य’ है।
एक ही शब्द का अनेक अर्थों में प्रयोग के उदाहरण :

(1) त्यों ‘रसखानि’ वही रसखानि जु है रसखानि सो है रसखानि ।

(2) सारंग नयन बयन पुनि सारंग सारंग तसु सन्धाने ।
सारंग उपर उगल दुर्ड सारंग केलि करिए मधुपाने ॥

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