Punrukti (‘पुनरुक्ति’), का अर्थ – पुन: दुहराना है। वाक्यों में इनका प्रयोग अलंकार के रूप के कई प्रकार से किया जाता है ।
पुनरुक्ति या पुनरुक्त शब्द के भेद –
(1) पूर्ण पुनरुक्त (Purn Punrukt)
(2) अपूर्ण पुनरुक्त तथा (Apurn Punrukt)
(3) अनुकरणवाचक पुनरुक्त । (Anukaran vachak Punrukt)




1. पूर्ण पुनरुक्त शब्द– (Purn Punrukt Shabd) जब कोई एक शब्द एक ही साथ दो बार अथवा तीन बार प्रयुक्त होता है, तब उसे पूर्ण पुनरुक्त शब्द कहते हैं । जैसे-देश-देश, बड़े-बड़े, चलते-चलते, कौड़ी-कौड़ी, घर-घर, हँसी-हँसी, पानी-पानी, जय-जय-जय, इत्यादि ।
संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया आदि के आधार पर पूर्ण-पुनरुक्त शब्दों के उदाहरण-

संज्ञा पूर्ण पुनरुक्त शब्द– (Sangya Purn Punrukt Shabd) कौड़ी-कौड़ी, रोम-रोम, घर-घर, इत्यादि । जैसे-उसने कौड़ी-कौडी करके माया जोडी ।
सर्वनाम पूर्ण पुनरुक्त शब्द- कोई-कोई, अपना-अपना, क्या-क्या, जिस-जिस, किस-किस, जो-जो, कुछ-कुछ, इत्यादि ।
जैसे-कोई-कोई ऐसी भूल कर बैठता है ।

विशेषण पूर्ण पुनरुक्त शब्द– (Visheshan Purn Punrukt Shabd) हरी-हरी, नये-नये, बड़े-बड़े, छोटे-छोटे, मीठे-मीठे, अच्छे-अच्छे, ऊँचे-ऊँचे, काले-काले, फूले-फूले, फीका-फीका, खट्टा-खट्टा, इत्यादि ।
जैसे-छोटी-छोटी आँखों से वह सबको देख रहा था ।
क्रिया पूर्ण पुनरुक्त शब्द- जाते-जाते, आते-आते, रोते-रोते, हँसते-हँसते, गाते-गाते, खाते-खाते, छपते-छपते, पढ़ते-पढ़ते, लिखते-लिखते, इत्यादि ।
जैसै—जते-जाते उसने आखिर अपनी बात कह ही डाली ।

क्रियाविशेषण पूर्ण पुनरुक्त शब्द- (Kriyavisheshan Purn Punrukt Shabd) ऊपर-ऊपर, नीचे-नीचे, पास-पास, धीरे-धीरे, कभी-कभी, आगे-आगे, साथ-साथ, कहीं-कहीं, पहले-पहले, अभी-अभी, जब-जब, कहाँ-कहाँ, इत्यादि ।
जैसे-रोगी धीरे-धीरे चल रहा था।

विस्मयादिबोधक पूर्ण पुनरुक्त शब्द- (Vismayadi bodhak Purn Punrukt Shabd) हा-हा ! छि:-छि: ! हाय-हाय ! जय-जय-जय ! अरे-अरे ! राम-राम ! वाह-वाह ! हरे-हरे ! जैसे-छि:-छि: ! तुमने यह क्या अनर्थ कर डाला ?

विभक्तिसहित पूर्ण पुनरुक्त शब्द- (Vibhakti Sahit Purn Punrukt Shabd)यहीं का यहीं, वहीं का वहीं, गाँव का गाँव, घर का घर, साथ ही साथ, पास ही पास, झुंड का झुंड, मन ही मन, बातों ही बातों में, आगे ही आगे, कला ही कला, दूध ही दूध, इत्यादि ।
जैसे-मेरा काम यहीं का यहीं कर दो ।




2. अपूर्ण पुनरुक्त शब्द- ((Apurn Punrukt) जब किसी शब्द के साथ कोई समानुप्रास सार्थक या निरर्थक शब्द आता है, तब ये दोनों शब्द अपूर्ण पुनरुक्त शब्द कहलाते हैं। जैसे-आस-पास, आमने-सामने, देख-भाल, इत्यादि ।
अपूर्ण पुनरुक्त शब्द संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया तथा क्रियाविशेषण आदि के संयोग से बनते हैं ।
ये तीन प्रकार के होते हैं –

i   दो सार्थक शब्दों के मेल से, जिनमें दूसरा शब्द पहले का समानुप्रास होता |
संज्ञा-बीच-बचाव, बाल-बच्चे, दाल-दलिया, झगडा-झाँसा, काम-काज, धौल-धप्पा, जोर-शोर, हलचल, काम-धाम, झाँसा-पट्टी, इत्यादि ।
सर्वनाम-जो-सो, जो-कोई, जौन-तौन, कौन-क्या, जिस-तिस, इत्यादि ।
विशेषण-ऐसा-वैसा, काला-कलूटा, गोरा-चिट्टा, चौड़ा-चकला, भरा-भूरा, अंधा-काना, फट-टूटा, इत्यादि ।
क्रिया-समझना-बूझना, लेना-देना, देना-पावना, लड़ना-झगड़ना, बोलना-चालना, सोचना-समझना, हँसना-रोना, खाना-पीना, हिलना-डोलना, रोना-धोना, इत्यादि ।
क्रियाविशेषण-यहाँ-वहाँ, इधर-उधर, जैसे-तैसे, जहाँ-तहाँ, दाँयें-बाँयें, आर-पार, साँझ-सवेरे, जब-तब, सदा-सर्वदा, जैसे-तैसे, सुबह-सवेरे, इत्यादि ।

ii. दो निरर्थक शब्दों की आवृत्ति से ।
जैसे-अंट-संट, टीम-टाम, खटाखट, झटाझट, सटासट, फटाफट इत्यादि ।

iii. एक सार्थक और एक निरर्थक शब्द के मेल से । जैसे-
संज्ञा-टाल-मटोल, पूछ-ताछ, भीड़-भाड़, खाना-वाना, हल्ला-गुल्ला, इत्यादि ।
विशेषण-ठीक-ठाक, टेढ़ा-मेढ़ा, आँका-बाँका, चलता-पुरजा, इत्यादि ।
क्रिया-दौड़ना-धूपना, होना-हवाना, आदि ।
क्रियाविशेषण-औने-पौने, आधा-पौना, आमने-सामने, आस-पास, इत्यादि ।




3. अनुकरणवाचक पुनरुक्त शब्द- (Anukaran vachak Punrukt) पदार्थ की यथार्थ अथवा कल्पित ध्वनि को ध्यान में रखकर जो शब्द बनाये जाते हैं, उन्हें अनुकरणवाचक पुनरुक्त शब्द कहते हैं । जैसे-
संज्ञा- भनभन, खटखट, झनझन, पटपट, बकबक
विशेषण-कुछ अनुकरणवाचक संज्ञाओं में ‘इया’ प्रत्यय जोड़ने से अनुकरणवाचक विशेषण बनते हैं । जैसे-गड़बड़िया, खटपटिया, भड़भड़िया, फटफटिया, इत्यादि ।
क्रिया- थरथराना, खटखटाना, हिनहिनाना, सनसनाना इत्यादि ।
क्रियाविशेषण-झटपट, तड्तड्, पटपट, छमछम, थरथर, गटगट, लपझप, भदभद, खदखद, सड़ासड़, दनादन, भड़ाभड, फटाफट, काटकूट, धडाधड़, छमाछम, इत्यादि ।
अनर्गल- टांयटांय फिस्स, लबडधोंधों, लट्टापांडे, डपोरशंख, अग्गड़-बग्गड, अंड-बंड, इत्यादि ।

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