Ras Definition (रस की परिभाषा)-

कविता, कहानी, या किसी नाटक इत्यादि को पढ़ते या देखते समय जो  भाव हमारे हृदय के अन्दर आते हैं उन्हें हिंदी  साहित्य में रस के नाम से जाना जाता है|




विभाव, अनुभाव, व्यभिचारी भाव के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है।

1.विभाव (Vibhav Ras)- जो व्यक्ति, पदार्थ अथवा बाह्य विकार अन्य व्यक्ति के हृदय में भावों को जाग्रत् करते हैं, उन भावोद्बोधक अथवा रसाभिव्यक्ति के कारणों को विभाव कहते हैं। इनके आश्रय से रस प्रकट होता है, यह कारण निमित्त अथवा हेतु कहलाते हैं।
ये विभाव आश्रय में भावों को जाग्रत भी करते हैं और उन्हें उद्दीप्त भी करते हैं। इस कारण इसके ‘आलम्बन’ तथा ‘उद्दीपन’ नामक दो भेद किये गये हैं ।

2. अनुभाव (Anubhav Ras)- वाणी तथा अंग-संचालन आदि की जिन क्रियाओं से आलम्बन तथा उद्दीपन आदि के कारण आश्रय के हृदय में जाग्रत् भावों का साक्षात्कार होता है, वह व्यापार अनुभाव कहलाता है। इस रूप में वे विकाररूप तथा भावों के सूचक हैं ।
भावों की सूचना देने के कारण वे भावों के अनु अर्थात् पश्चातवर्ती एवं कार्यरूप माने जाते हैं, इन्हीं अनुभावों के सहारे ही पात्र के भावों को जाना जाता है
प्रत्येक रस के विचार से यह अनुभाव भी अलग अलग होते हैं । इनके कायिक, मानसिक, आहार्य, वाचिक एवं सात्त्विक नामक भेद किये गये हैं ।




3. व्यभिचारी भाव (Vyabhichari Bhav Ras)– इसे संचारी भाव के नाम से भी जाना जाता है । रस के सम्बन्ध में जो अन्य वस्तुओं की ओर संकेत करें उन्हें व्यभिचारी भाव माना गया है|
अथवा, जो भाव विशेष रूप से स्थायी भाव की पुष्टि के लिए तत्पर या अभिमुख रहते हैं और स्थायी भाव के अन्तर्गत आविर्भूत और तिरोहित होते दिखाई देते हैं, वे संचारी या व्यभिचारी भाव कहलाते हैं ।
जैसे—लहरें समुद्र में पैदा होती हैं और उसी में विलीन हो जाती हैं, वैसे ही रति आदि स्थायी भावों में निर्वेद आदि संचारी भाव (व्यभिचारी भाव) मुख्य रूप से स्थायी भात में ही उठते-गिरते हैं । लहरों के उठने-गिरने से समुद्र का समुद्रत्व और भी पुष्ट होता है, ठीक उसी तरह ‘व्यभिचारी (या संचारी) भाव’ स्थायी भावों के पोषक होते हैं । स्थायी भाव स्थिर हैं, तो व्यभिचारी (संचारी) भाव संचरणशील और अस्थिर ।

व्यभिचारी (संचारी) भावों के प्रकार- 1. निर्वेद, 2. आवेग, 3. दैन्य, 4. श्रम, 5. मद, 6. जड़ता, 7. औग्रय (उग्रता), 8. मोह, 9. विबोध, 10. स्वप्न 11. अपस्मार, 12. गर्व, 13. मरण, 14. अलसता, 15. अमर्ष, 16. निद्रा, 17. अवहित्था, 18 औत्सुक्य, 19. उन्माद, 20. शंका, 21. स्मृति, 22. मति, 23. व्याधि, 24. सन्त्रास, 25. लज्जा, 26. हर्ष, 27. असूया, 28. विषाद, 29. धृति, 30. चपलता, 31. ग्लानि, 32. चित्रा और 33. वितर्क ।

4. स्थायी भाव (Asthai Bhav Ras)- काव्यचित्रित श्रृंगार आदि रसों के मूलभूत कारण ‘स्थायी भाव’ हैं ।




‘भाव’ का अर्थ ‘व्याप्ति’ होता है और भाव इसलिए भाव कहलाते हैं कि वचन, अंगभंगी एवं सात्त्विकों (स्तम्भ, स्वेद, रोमांच इत्यादि ) के अभिनय के द्वारा वे काव्यार्थ की भावना कराते हैं, कवि अपनी रचना को सामाजिक के रसास्वादन की वस्तु तभी बना सकता है, जब वह भावगर्भित हो, भाव की अनुपस्थिति में कवि एवं सामाजिक के बीच कोई मानसिक अन्त:करणीय सम्बन्ध स्थापित नहीं हो सकता ।

Ras ke Bhed (रसों के भेद) :

रसों के नौ मुख्य भेद हैं-

1. श्रृंगार,

2. हास्य,

3. रौद्र,

4. करुण,

5. वीर,

6. वीभत्स,

7. भयानक,

8. अद्भुत तथा

9. शांत




हिंदी व्याकरण | संज्ञा | सर्वनाम | विशेषण | क्रिया | क्रियाविशेषण | वाच्य | अव्यय | लिंग | वचन | कारक | काल | उपसर्ग | प्रत्यय | समास | संधि | पुनरुक्ति | शब्द विचार | पर्यायवाची शब्द | अनेक शब्दों के लिए एक शब्द | हिंदी कहावत | हिंदी मुहावरे | अलंकार | छंद | रस

75 Comments on Ras in Hindi Grammar (रस – हिंदी व्याकरण)

  1. अगर रसों का भेद का भी उदहारण पोस्ट कर दिया गया होता तो और भी अच्छा होता।

  2. I don’t think it’s really helpful. ….
    Dear editor try to do something better. Don’t write like junior’s

  3. Plzz mention asthai bhav for ras with examples if possible…. Nd the above mentioned info is also very useful thnkxx for the guidence….

    • Shringar- Rati
      Hasy- haas
      Karun- Shok
      Raudra- krodh
      Veer- utsaahh
      Bhayanak- bhay
      Veebhast- jugupsa
      Adbhut- asharya
      Shant- sham,nirved
      Bhakti- ishwaranurag
      Vatsalya- batsalya.

  4. It was really helpful to understand but …it should have been a little easy language nd sthayi bhav .. vyabhichari bhav.. etc. of every ras should have been givenwith examples
    plz.. that will make it more informant nd intresting

  5. Vyabhichari Bhav Jaisa Kuch Nhi hota hindi vyakaran me ! bhav do tarah ke hote hain-

    (1) Sthayi Bhav
    (2) Sanjchari Bhav

  6. ras have 11 parts but you show only 9 parts where the two parts bakati ras and watsala ras and please ad the exmples

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *