Samas Vigraha – Avyayi Bhav (अव्ययीभाव समास विग्रह)

अव्ययी भाव:

पद विग्रह
अनुकूल कुल के अनुसार (मन के मुताबिक)
अनुरूप रूप के समान
अभ्यागत अभि आगत
आकंठ आा कठ (वर्कठ तक)
आजन्म आ जन्म (जन्म से लेकर)
आजीवन आ जीवन (जीवन भर)
आमरण आ मरण (मरणापर्यंत)
आसमुद्र आ समुद्र (समुद्र तक)
आपादमस्तक पाद (पैर) से मस्तक तक
अकारण बिना कारण के
अभूतपूर्व जो पूर्व नहीं भूत (हुआ) है
अनजाने बिना जाने हुए
अनुगुण गुण के योग्य
आजानु घुटना (जानु) तक
खंड-खंड एक खंड से दूसरा खंड
उपकूल कूल के समीप
उपगृह गृह के निकट
एकाएक एक-ब-एक
घड़ी-घड़ी घडी के बाद घडी
घर-घर एक घर से दूसरा घर
दिनानुदिन दिन-प्रतिदिन
धीरे-धीरे धीरे के बाद भी धीरे
धड़ा – धड़ जल्दी से
निर्विकार बिना विकार के
निर्विवाद बिना विवाद के
निधड़क बिना धडक के
निर्भय बिना भय के
परोक्ष अक्षि (ऑख) से परे
प्रत्यक्ष अक्षि के आगे
प्रतिमास हर मास
प्रत्येक हर एक, एक-एक
प्रत्यंग हर अंग
प्रत्यूपकार उपकार के प्रति
प्रतिदिन हर दिन या दिन-दिन
प्रतिपल हर पल, पल-पल
प्रतिबार हर बार
बेकाम बिना काम का
बीचोबीच ठीक बीच में
बेखटके बिना खटके के
बखूबी खूबी के साथ
बेकायदा बिना कायदे के
बेरहम बिना रहम के
बेफायदा बिना फायदा के
बरम बार बार बार
भरपेट पेट भरकर
भरसक शक्ति भर
मनमाना मन के अनुसार
यथारूचि रूचि के अनुसार
यथाक्रम क्रम के अनुसार
यथास्थान स्थान के अनुसार
यथाशक्ति शक्ति के अनुसार
यथासमय समय के अनुसार
यथाशीघ्र जितना शीघ्र हो
यथासंभव जितना संभव हो
समक्ष अक्षि के सामने (आँख के सामने)
सरासर एकदम से
सापेक्ष अपेक्षा सहित
साफ साफ बिकुल साफ
हाथो हाथ एक हाथ से दुसरे हाथ
हर घड़ी घड़ी घड़ी
हर रोज हर रोज
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