Kriya Visheshan | क्रियाविशेषण Kriya Visheshan ke Bhed

Kriya Visheshan (क्रियाविशेषण) :

जिस शब्द से क्रिया की विशेषता का ज्ञान होता है, उसे क्रियाविशेषण कहते हैं।
जैसे-यहाँ, वहाँ, अब, तक, जल्दी, अभी, धीरे, बहुत, इत्यादि ।
क्रियाविशेषणों का वर्गीकरण तीन आधारों पर किया जाता है-
(1) प्रयोग
(2) रूप
(3) अर्थ

क्रियाविशेषण

(1) प्रयोग

(2) रूप

(3) अर्थ

(क) साधारण (क) मूल (क) स्थानवाचक
(ख) संयोजक (ख) यौगिक (ख) कालवाचक
(ग) अनुबद्ध (ग) स्थानीय (ग) परिमाणवाचक
(घ) रीतिवाचक

प्रयोग के आधार पर क्रियाविशेषण तीन प्रकार के होते हैं:
(क) साधारण क्रियाविशेषण (Sadhran Kriya Visheshan) – जिन क्रियाविशेषणों का प्रयोग किसी वाक्य में स्वतंत्र होता है, उन्हें साधारण क्रियाविशेषण कहते हैं । जैसे-‘हाय ! अब मैं क्या करूं ?’, ‘बेटा जल्दी आओ !’, ‘अरे ! वह साँप कहाँ गया ?’
(ख) संयोजक क्रियाविशेषण (Sanyojak Kriya Visheshan) – जिन क्रियाविशेषणों का संबंध किसी उपवाक्ये के साथ रहता है, उन्हें संयोजक क्रियाविशेषण कहते हैं । जैसे- जब रोहिताश्व ही नहीं, तो मैं जी के क्या करूंगी 1′, ‘जहाँ अभी समुद्र है, वहाँ किसी समय जंगल था ।
(ग) अनुबद्ध क्रियाविशेषण (Anubaddh Kriya Visheshan) – अनुबद्ध क्रिय वशेषण वे हैं, जिनका प्रयोग निश्चय के लिए किसी भी शब्द-भेद के साथ हो सकता है ।
जैसे- यह तो किसी ने धोखा ही दिया है ।
मैंने उसे देखा तक नहीं ।
आपके आने भर की देर है।

रूप के आधार पर भी क्रियाविशेषण तीन प्रकार के होते हैं-
(क) मूल क्रियाविशेषण (Mul Kriya Visheshan) – जो क्रियाविशेषण दूसरे शब्दों के मेल से नहीं बनते, उन्हें मूल क्रियाविशेषण कहते हैं । जैसे- ठीक, दूर, अचानक, फिर, नहीं, इत्यादि
(ख) यौगिक क्रियाविशेषण (Yaugik Kriya Visheshan) – जो क्रियाविशेषण दूसरे शब्दों में प्रत्यय या पद जोडने से बनते हैं, उन्हें यौगिक क्रियाविशेषण कहते हैं ।
जैसे-जिससे, किससे, चुपके से, देखते हुए, भूल से, यहाँ तक, झट से, कल से, इत्यादि ।
संज्ञा से -रातभर, मन से
सर्वनाम से -जहाँ, जिससे
विशेषण से-चुपके, धीरे
अव्यय से – झट से, यहाँ तक
धातु से -देखने आते
(ग) स्थानीय क्रियाविशेषण (Sthaniya Kriya Visheshan) – अन्य शब्द-भेद, जो बिना किसी रूपांतर के किसी विशेष स्थान पर आते हैं, उन्हें स्थानीय क्रियाविशेषण कहते हैं।
जैसे – वह अपना सिर पढ़ेगा
तुम दौड़कर चलते हो

अर्थ के आधार पर क्रियाविशेषण के चार भेद हैं:
(i) स्थानवाचक क्रियाविशेषण (Sthan Vachak Kriya Visheshan) – यह दो प्रकार का होता है:
स्थितिवाचक – यहाँ, वहाँ, साथ, बाहर, भीतर, इत्यादि ।
दिशावाचक – इधर उधर, किधर, दाहिने, वॉयें, इत्यादि ।
(ii) कालवाचक क्रियाविशेषण (Kaal Vachak Kriya Visheshan) – इसके तीन प्रकार हैं
समयवाचक-आज, कल, जब, पहले, तुरन्त, अभी, इत्यादि
अवधिवाचक-आजकाल, नित्य, सदा, लगातार, दिनभर, इत्यादि
पौन:पुण्य (बार-बार) वाचक-प्रतिदिन, कई बार, हर बार, इत्यादि
(iii)परिमाणवाचक क्रियाविशेषण (Pariman Vachak Kriya Visheshan) – यह भी कई प्रकार का है
अधिकताबोधक – बहुत, बड़ा, भारी, अत्यन्त, इत्यादि
न्यूनताबोधक – कुछ, लगभग, थोडा, प्राय: इत्यादि
पर्याप्तबोधक – केवल, बस, काफी, ठीक, इत्यादि
तुलनाबोधक –इतना, उतना, कम, अधिक, इत्यादि
श्रेणिबोधक – थोड़ा-थोड़ा, क्रमश: आदि
(iv)रीतिवाचक क्रियाविशेषण (Riti Vachak Kriya Visheshan) – जिस क्रिया-विशेषण से प्रकार, निश्चय, अनिश्चय, स्वीकार, निषेध, कारण इत्यादि के अर्थ प्रकट हो उसे रीतिवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं ।
इन अर्थों में प्राय: रीतिवाचक क्रियाविशेषण का प्रयोग होता है
प्रकार – जैसे, तैसे, अकस्मात्, ऐसे ।
निश्चय – नि:संदेह, वस्तुतः, अवश्य ।
अनिश्चय – संभवत:, कदाचित्, शायद ।
स्वीकार – जी, हाँ, अच्छा
निषेध – नहीं, न, मत
कारण – क्योंकि, चूँकि, किसलिए
अवधारण – तो, भी, तक
निष्कर्ष – अतः, इसलिए ।

संज्ञा – Sangya * सर्वनाम – Sarvnam * विशेषण – Visheshan * क्रिया – Kriya * अव्यय – Avyay * लिंग -Ling * वचन – Vachan * कारक – Kaarak * काल – Kaal * उपसर्ग – Upsarg * प्रत्यय-Pratyay * समास – Samas * संधि – Sandhi * पुनरुक्ति – Punrukti * शब्दविचार – Shabd Vichar * पर्यायवाची शब्द – Paryayvachi Shabd * अनेक शब्दों के लिए एक शब्द – Anek Shabdon Ke Ek Shabd * हिंदी कहावतें – Kahawat * हिंदी मुहावरे – Hindi Muhavare * अलंकार – Alankar * छंद – Chhand * रस – Ras

Visheshan Aur Visheshan ke Bhed विशेषण और विशेषण के भेद

Visheshan Definition in Hindi:

संज्ञा और सर्वनाम की विशेषता बतानेवाले शब्द को (विशेषण Visheshan) कहते हैं।
जैसे-

‘काली’ गाय,
‘अच्छा’ लड़का।
विशेषण जिस शब्द की विशेषता बतलाता है, उसे विशेष्य कहते हैं।
जैसे-उजली गाय मैदान में खड़ी है। यहाँ ‘उजली’ विशेषण और ‘गाय’ विशेष्य है ।

Visheshan Ke Bhed
अर्थ की दृष्टि से विशेषण (Visheshan) के मुख्यत: छह भेद हैं-
(1) गुणवाचक विशेषण (Gunvachak Visheshan)
(2) परिमाणवाचक विशेषण (Parimaan Vachak Visheshan)
(3) संख्यावाचक विशेषण (Sankhya Vachak Visheshan)
(4) सार्वनामिक विशेषण (Sarvanamik Visheshan)
(5) तुलनाबोधक विशेषण (Tulna Bodhak Visheshan)
(6) संबंधवाचक विशेषण (Sambandh Vachak Visheshan)

Related Topics:
Hindi Vyakaran (हिंदी व्याकरण) | Sangya (संज्ञा) | Sarvnaam (सर्वनाम) | Kriya (क्रिया) | Avyay (अव्यय) | Ling (लिंग)

(1) गुणवाचक विशेषण– (Gunvachak Visheshan) संज्ञा या सर्वनाम के गुण, रूप, रंग, आकार, अवस्था, स्वभाव, दशा, स्वाद, स्पर्श, गंध, दिशा, स्थान, समय, भार, तापमान, इत्यादि का बोध करानेवाले शब्द गुणवाचक विशेषण कहलाते हैं। गुणवाचक विशेषण के साथ ‘सा’ जोड़कर इसके गुणों में कमी की जाती है । जैसे-मोटा-सा, थोड़ा-सा, छोटा-सा, इत्यादि ।

(2) परिमाणवाचक विशेषण (Parimaan Vachak Visheshan) यह किसी वस्तु की नाप या तौल का बोध कराता है । जैसे-सेर भर दूध, थोड़ा पानी, कुछ पानी, सब धन, और घी, इत्यादि । परिमाणवाचक के दो भेद हैं-
(i) निशिचत परिमाणवाचक– दो सेर घी, दस हाथ जगह, आदि ।
(ii) अनिश्चित परिमाणवाचक– बहुत दूध, थोड़ा धन, पूरा आनन्द, इत्यादि ।

(3) संख्यावाचक विशेषण (Sankhya Vachak Visheshan) -जिस विशेषण से संज्ञा या सर्वनाम की संख्या का बोध हो, उसे संख्यावाचक विशेषण कहते हैं।
जैसे—चार घोडे, तीस दिन, कुछ लोग, सब लड़के, इत्यादि ।
संख्यावाचक के भी दो भेद हैं
(i) निश्चित संख्यावाचक–आठ गाय, एक दर्जन पेन्सिल, आदि ।
(ii) अनिश्चित संख्यावाचक-कुछ लड़के, कई आदमी, थोड़े चावल, इत्यादि ।

(4) सार्वनामिक विशेषण (Sarvanamik Visheshan)

जिस सर्वनाम का प्रयोग विशेषण की तरह होता है, उसे सार्वनामिक विशेषण कहते हैं। जैसे-वह आदमी, यह लड़की ।
इन वाक्यों में ‘वह’ तथा ‘यह’ ‘आदमी’ और ‘लड़की’ की विशेषता बताते हैं ।
सार्वनामिक विशेषण के भी दो भेद हैं-
(i) मौलिक सार्वनामिक विशेषण–सर्वनाम का मूल रूप जो किसी संज्ञा की विशेषता बताए, वह मौलिक सार्वनामिक विशेषण कहलाता है। जैसे- यह लड़का, कोई नौकर, कुछ काम इत्यादि।
(ii) यौगिक सार्वनामिक विशेषण-सर्वनाम का रूपान्तरित रूप, जो संज्ञा की विशेषता बताए, वह यौगिक सार्वनामिक विशेषण कहलाता है। जैसे- ऐसा आदमी, कैसा घर, उतना काम इत्यादि।
(5) तुलनाबोधक विशेषण (Tulna Bodhak Visheshan)-दो या दो से अधिक वस्तुओं या भावों के गुण, रूप, स्वभाव, स्थिति इत्यादि की परस्पर तुलना जिन विशेषणों के माध्यम से की जाती है, उन्हें तुलनाबोधक विशेषण कहते हैं ।
तुलना की तीन अवस्थाएँ होती हैं—
(1) मूलावस्था,
(2) उत्तरावस्था,
(3) उत्तमावस्था।

जैसे- अधिक, अधिकतर, अधिकतम । ये क्रमश: तुलनात्मक अवस्थाएँ हैं ।

(6) संबंधवाचक विशेषण (Sambandh Vachak Visheshan)-जो विशेषण किसी वस्तु की विशेषताएँ दूसरी वस्तु के संबंध में बताता है, तो उसे संबंधवाचक विशेषण कहते हैं ।
इस तरह के विशेषण संज्ञा, क्रिया-विशेषण तथा क्रिया से बनते हैं ।
जैसे-‘दयामय’ ‘दया’ संज्ञा से, ‘बाहरी’ ‘बाहर’ क्रियाविशेषण से, ‘गला’ ‘गलना’ क्रिया से ।

विशेषणों का निर्माण-
कुछ शब्द तो अपने मूल रूप में ही विशेषण होते हैं। जैसे-अच्छा, बुरा, सुंदर, बदमाश, इत्यादि ।

लेकिन कुछ विशेषण दूसरी जातियों के शब्दों में उपसर्ग, प्रत्यय आदि लगा कर भी बनाये जाते हैं, ऐसे विशेषणों को व्युत्पन्न विशेषण कहते हैं| उदाहरण-

(क) संज्ञा से– उपसर्ग लगाकर-निर्दय, निस्संकोच, निर्गुण, निर्बल, प्रबल, इत्यादि । प्रत्यय लगाकर-धनी, इलाहाबादी, बलवान, बंबइया, इत्यादि ।
(ख) सर्वनाम से-आप से आपसी, वह से वैसा, यह से ऐसा, इत्यादि ।
(ग) क्रिया से-लगना से लागू, भूलना से भुलकृड्, देखना से दिखाऊ, बेचना से बिकाऊ, इत्यादि ।
(घ) अव्यय से-भीतर से भीतरी, बाहर से बाहरी, आदि ।

विशेषण की कुछ विशेषताएँ :
(क) विशेषण के लिंग, पुरुष और वचन विशेष्य के अनुरूप ही होते हैं । अर्थात् विशेष्य (संज्ञा या सर्वनाम) के जो लिंग, पुरुष और वचन होंगे, वही विशेषण के भी होंगे ।

(ख) जब एक विशेषण के एक से अधिक विशेष्य हों, तो जो विशेष्य उसके बिलकुल निकट होगा, उसी के अनुसार विशेषण के लिंग, वचन आदि होंगे । जैसे— उजली धोती और कुरता ।

(ग) सार्वनामिक विशेषण तथा सर्वनाम की पहचान-कुछ सार्वनामिक विशेषणों तथा निश्चयवाचक सर्वनामों के रूप में कोई फर्क नहीं होता । दोनों आवस्थाओं में उनका रूप एकसमान बना रहता है । अतः उनकी पहचान के लिए इस बात का ध्यान रखें कि यदि ऐसे शब्द संज्ञा के पहले आयें, तो विशेषण होंगे और यदि वे संज्ञा के स्थान पर या उसके बदले अकेले प्रयुक्त हों, तो वे सर्वनाम होंगे ।
जैसे-(1) यह गाड़ी मेरी है । इस वाक्य में ‘यह’ संज्ञा (गाड़ी) के पहले आया है, अत: विशेषण है ।
(2) वह आपके साथ रहता है| इस वाक्य में ‘वह’ संज्ञा के रूप में अकेले ही आया है, अतः ‘वह’ सर्वनाम है|

(घ) जब एक से अधिक शब्दों के मेल से किसी संज्ञा का विशेषण बनता है, तब उस शब्द-समूह को विशेषण-पदबंध कहते हैं । जैसे-भवन-निर्माण के काम में आनेवाले सारे सामान काफी महँगे हो गये हैं ।

प्रविशेषण:- जिस शब्द से विशेषण की विशेषता का ज्ञान होता है, उसे प्रविशेषण कहते हैं ।
जैसे-
(1) वह बहुत अच्छा विद्यार्थी है।
(2) कौशल बड़ा साहसी है।
(3) हमारे पिताजी अत्यधिक उदार हैं।
(4) घनश्याम अतिशय भावुक व्यक्ति है।
ऊपर के सभी वाक्यों के काले अक्षरों वाले शब्द प्रविशेषण के उदाहरण हैं, क्योंकि ये सभी विशेषण की विशेषता का ज्ञान कराते हैं।

विशेषण का प्रयोग :
प्रयोग के विचार से विशेषण के दो भेद हैं-
(1)विशेष्य-विशेषण और (2) विधेय-विशेषण।

(1) विशेष्य-विशेषण–विशेष्य से पहले आनेवाले विशेषण को विशेष्य-विशेषण कहते हैं। जैसे-चंदू अच्छा लड्का है । इस वाक्य में ‘अच्छा’ लड़का का विशेषण है और उसके पहले आया है, अतः यहाँ ‘अच्छा’ विशेष्य-विशेषण है ।

(2) विधेय-विशेषण-जो विशेषण विशेष्य के बाद प्रयुक्त होता है, उसे विधेय-विशेषण कहते हैं । जैसे-यह आम मीठा है । इस वाक्य में ‘मीठा’ ‘आम’ का विशेषण है, और उसके बाद आया है, अत: विधेय-विशेषण है ।

 

पर्यायवाची शब्द | Paryayvachi Shabd

पर्यायवाची शब्द (Paryayvachi Shabd in Hindi)

Sr No. शब्द पर्यायवाची शब्द
1 अंग अंश, कलेवर, भाग, देह, हिस्सा, अवयव
2 अंक चिह्न, छाप, अदद, पत्र, पत्रिकाओं की प्रति, लिखावट, अक्षर, नाटक का खंड
3 अंधकार तम, तमिस्रा, तिमिर, स्याही , अँधेरा, अंधतमस
4 अटूट मजबूत, अखंडित, अपार, पक्का, अजेय, पुष्ट
5 अग्नि आग, अनल, वह्नि, पावक, वायुसखा, दहन, तपन, दव, शिखी, हरि
6 अनुपम अपूर्व, अनोखा, अद्भुत, अनूठा, अद्वितीय, अतुल, अनन्य
7 अन्नंत असीम, बेहद, अपार, अविनाशी, शेषनाग, विष्णु, लक्ष्मण
8 अमृत पीयूष, सुधा, अमिय, जीवनोदक, अमित, जीवन
9 अश्व हय, घोटक, सैंधव, तुरंग, रवि, पुत्र, बाजि, घोड़ा, तुरंगम, वाह
10 असुर दनुज, दानव, राक्षस, निशाचर, रजनीचर, निशिाचर, दैत्य, दितिसुत, शुक्रशिष्य, यातुधान, देवारि, इन्द्रारि
11 अभिमान अस्मिता, अह, अहकार, अवलेप, अहनिका, अहम्मन्यता, आत्मश्लाघा, गर्व, घमंड, दर्प, दंभ, मद, मान, मिथ्याभिमान
12 अर्जी प्रार्थनापत्र, निवेदनपत्र, दरख्वास्त, उावेदन, पत्र
13 अतिशय अत्यधिक, अतिवेल, अतिमात्र, अतिरेकः, भृश
14 अपमान उपेक्षा, अनादर, अवमानना, अवज्ञा, अवहेलना, बेइज्जती
15 अतिथि पाहुन, पाहुना, अभ्यागत, आगंतुक, मेहमान
16 अरण्य जगल, वन, विपिन, कांतार, कानन, अटवी
18 अन्वेषण अनुसंधान, खोज, जाँच, शोध, छानबीन, पूछताछ
19 अभिव्यक्ति प्रकटन, प्रकाशन, स्पष्टीकरण, व्यक्त होना, स्फुटीकरण
20 अदभुत अनुपम, अनूठा, अद्वितीय, अनोखा, अतुल, अपूर्व, न्यारा, निराला, विलक्षण

 

 

21 सेना अनी, कटक, चमू, कुमक, फौज, दल, सेना
22 अवनति अधोगति, अपकर्ष, क्षय, ह्वास, पतन, अध, पतन, गिरावट, उतार, झुकाव
23 आँख अक्षि, अंबक, ईक्षण, चक्षु, नयन, दृष्टि, नेत्र, लोचन, विलोचन, दीठ, चख, चश्म
24 आकाश अंबर, अनंत, अंतरिक्ष, अभ्र, आसमान, गगन, दिव, नभ, पुष्कर, व्योम, विष्णुपद, सारंग, फलक
25 आदर सम्मान, इज्जत, कद्र, पूज्यभाव, प्रतिष्ठा, समादर, उत्सुकता, प्रयत्न, प्रेम, आरंभ, सत्कार
26 आनंद आमोद, उल्लास, ख़ुशी, मोद, सुख, हर्ष, परितोष, प्रमोद
27 आरंभ शुरू, श्रीगणेश, प्रारंभ, उपक्रम, इब्तिदा, आदि, उत्पति
28 आम आम्र, रसाल, अमृतफल, चूत, प्रियांबु, अतिसौरभ, पिकबंधु
29 आसानी सरलता, सहजता, सुगमता, सुभीता, सुविधा
30 आश्रम मठ, विहार, कुटी, तपोवन, स्थान, अखाडा, संघ
31 इच्छा ईप्सा, अभिलाषा, चाह, कामना, आकाक्षा, मनोरथ, स्पृहा, ईहा, वांछा, एषणा
32 इंद्र सुरपति, पुरंदर, वासव, महेंद्र, देवराज, सुराधिप, शचीपति, मधवा, शक्र, शतमन्यु, सहस्राक्ष, सुरेश, मेघवाहन, शचीश, मरुत्पति, देवेन्द्र, सुरेन्द्र, अमरेश, मरुत्पाल, नाकपति
33 ईश्वर ईश, जगदीश, परमेश्वर, परमात्मा, भगवान्, सच्चिदानंद, जगन्नियंता, जगदीश्वर
34 उम्दा अच्छा, बड़िया, उत्तम, श्रेष्ठ, उमदा
35 उन्नति उत्थान, प्रगति, विकास, उत्कर्ष, अभ्युदय, वृद्धि, तरक्की, बढ़ती
36 उद्यान बगीचा, बगिया, बाग, वाटिका, उपवन
37 उपहास खिल्ली, चुटकी, छींटा, ताना, कटाक्ष, निंदा, बदनामी, तमाशा
38 एकता ऐक्य, मेल, समानता, अद्वितीय, अनुपम, एका, अभेद, भेदरहित, एकजुटता
39 ओस नीहार, हिम, प्रालेय, पाला, तुहिन, तुषार, मिट्टिका, शबनम
40 कपड़ा वस्त्र, वसन, अंबर, पट, चीर, अंशुष्क, आच्छादन, चैल

 

 

41 कुबेर किन्नरेश, यक्षराज, धनद, धनाधिप, राजराज
42 कमल सरोज, जलज, अब्ज, पंकज, अरविंद, पद्म, शतदल, अंबुज, सरसिज, सारंग, राजीव, वारिज, पुंडरिक, मृणाल, तामरस
43 कमला इंदिरा, पद्मा, पद्मजा, पद्मालया, पद्मासना, भार्गवी, रमा, लक्ष्मी, लोकमाता, विष्णुप्रिया, श्री, सिंधुजा, समुद्रजा, हरिप्रिया, क्षीरोदतनया, सिंधुतनया
44 क्रान्ति इन्कलाब, उलट फेर, परिवर्तन, गति, क्रमण, लौघना सूर्य का भ्रमण
45 कामदेव अनंग, अतनु, आत्मज, आत्मभू, कदर्प, काम, कुसमयुध, पंचबाण, पंचशर, प्रद्युम्न, पुष्पधन्वा, पुष्पचाप, मकरध्वज, रतिपति, मदन, मनसिज, मनोज, मन्मथ, मनोजात, मार, रतिसखा, रतीश, स्मर, कुसुमेषु
46 कबूतर कपोत, परेवा, पारापत, पंडुक
47 कोयल कोकिल, पिक, काकलीक, वनप्रिय, परभूत, काकली
48 क्रोध रोष, कोप, अमर्ष, गुस्सा, रूठ, कुद्ध
49 कल्याण शिव, मंगल, शुभ, भावुक, श्रेयस्य, कुशल
50 कृष्ण श्याम, कन्हैया, नंदनंदन, कसारि, गोपीवल्लभ, माधव, मुरारि, गोपीनाथ, वासुदेव, यशोदानंदन
51 काला असित, श्याम, स्याह, कृष्ण, नील
52 करुणा कृपा, दया, अनुकंपा, अनुक्रोश, कारुण्य
53 कसम शपथ, सौगंध, प्रतिज्ञा, प्रण
54 किताब पुस्तक, पोथी, ग्रंथ, विद्यासागर, बही, खाता, रजिस्टर
55 किनारा तीर, तट, सैकत, पुलिन, रोध, प्रतीर
56 किला कोट, दुर्ग, गढ़, स्थूलवसन
57 कोमल मृदु, मसृण, नरम, मुलायम, अरुक्ष, अकठोर, अपरुष
58 किरण मयूख, अंशु, रश्मि, मरीचि, प्रभा, गो
59 कौशल पटुता, निपुणता, नैपुण्य, दक्षता, चालाकी, कुशलता, पाटव
60 खुशी प्रसन्नता, हर्ष, आनंद, इच्छा, उल्लास, प्रमोद, प्रीति, मोद, सुख, आहलाद, आमोद

 

 

61 खून लहू. रक्त, लोहु, शोणित
62 खल अधम, दुष्ट, कुटिल, दुर्जन, धूर्त, बदमाश, पाजी, शैतान
63 खेती काश्त, कृषि, किसानी, बोआई, फसल, कृषिकर्म
64 गरुड़ पन्नगारि, वैनतेय, खगेश, खगेश्वर, नागांतक, पन्नगाशन, ताक्ष्र्य, विष्णुवाहन, सुपर्ण
65 गंगा जाह्नवी, त्रिपथगा, त्रिपथगामिनी, देवनदी, नदीश्वरी, भागीरथी, मंदाकिनी, विष्णुपदी, सुरधुनि, सुरनदी, सुरसरि, सुरापगा, देवापगा
66 गदहा खर, गर्दभ, रासभ, वैशाखनंदन, गधा, बेसर, धूसर, चक्रीवाहन्
67 गरीब दरिद्र, दीन, निर्धन, धनहीन, मुफलिस, दीन हीन, बेचारा, श्रीहीन
68 गणेश एकदंत, गजवदन, गजानन, गजास्य, गणनायक, गणपति, मोदकप्रिय, मोददात विघ्ननाशक, विघ्नराज, विनायक, शिवनंदन, उमासुत, गौरीनंदन, लम्बोदर, शिवनंदन, शिवनंदन, उमासुत, गणाधिपति, विनायक, विघ्ननासक
69 गाय गो, गौरी, धेनु भद्रा, सुरभी, गोंवी, हिंदुमाता
70 गीदड़ श्रृंगाल, शिवा, जंबुक, सियार
71 गति चाल, हरकत, दशा, मोक्ष, ज्ञान, उपाय, नासूर
72 घर गृह. सदन. भवन, आलय, निकेतन, शाला, कुटी, वास, धाम, आवास, निलय, ओक, आयतन
73 चद्रमा चाँद, चंद्र, हिमांशु, सुधांशु, सुधाकर, सुधाधर, राकेश, राकापति, शशि, सारंग, निशाकर्, निशापति, रजनीपति, मृगांक, कलानिधि, इंदु, शशांक, विधु, शशधर, कलाधर, मयंक, तारापति, द्विजराज, सोम, हिमकर, शुभ्रांशु, शीतांशु, शीतगु, कुमुद
74 चतुर कुशल, दक्ष, नागर, निपुण, पटु, प्रवीण, योग्य, विज्ञ, सयाना, होशियार,चालाक
75 चाल चलन, आचरण, चरित्र, चलन, ढंग, अदब, बनावट, छल, कूटयुक्ति
76 चाँदनी कौमुदी, ज्योत्स्ना, चंद्रिका, जुन्हाई, जोन्ह
77 चिड़िया अंडज, पक्षी, खग, विहग, विहगम, शकुन, द्विज, पतंग, पंछी, शकुंत, खेचर, परिंदा, पखेरू, विहग
78 चूहा मूषक, इंदुर, मूषिका, आखु, गणेशवाहन, मूस, मूसा, मूषिक
79 जल पानी, अंबु, नीर, सलिल, वारि, उदक, क्षीर, तोय, पय, सारंग, रस, अप, जीवन, अमृत, मेघपुष्प
80 जमीन पृथ्वी, भूमि, धरती, खेत, स्थल, धरा, मही, धरणी, भू, धरित्री, वसुन्धरा

 

 

81 जननायक लोकनायक, जननेता, जनसेवक, लोकसेवक, लोकप्रिय
82 जीवन जिदगी, प्राण, जीविका, वायु, पुत्र, जल, जान, हयात
83 झंडा ध्वज, ध्वजा, पताका, केतन, निशान, केतु, परचम
84 डाली डाल, शाखा, टहनी, पक्ष
85 डर भय, भीति, त्रास, खौफ, साध्वस, अंदेशा, आतंक, विभीषिका
86 चोर आखु, खनक, तस्तर, रजनीचर, चोरटा, चोरकट, चोरक
88 ठाकुर हजाम, ब्राह्मण, परमेश्वर, देव
89 तरंग लहर, लहरी, कल्लोल, ऊर्मि, वीचि, हिल्लोल
90 तलवार असि, करवाल, कृपाण, खंजर, खड्ग, चंद्रहास
91 तमाशा खेल, कौतुक, कौतूहल, कुतुक, कुतूहल
92 थोड़ा ईषत्, किंचित्, अल्प, न्यून, ऊन, स्तोक
93 द्रव्य दौलत, धन, संपति, संपदा, वित्त, विभूति, अर्थ
95 दुर्गा अजा, अभया, कल्याणी, कामाक्षी, कलिका, कुमारी, चंडिका, चामुंडा, धात्री, महागौरी, वागीश्वरी, शांभवी, अंबा, भवानी, सुभद्रा
96 देशभक्त देशानुरागी, देश
97 देवता सुर, अमर, आदित्य, त्रिदिवेश, वसु, वृदारक, सुभना, त्रिदस
98 देह शरीर, तन, काया, वदन, तनु
99 दिन दिवस, वार, वासर, समय, तिथि, काल, सदा, अहन्
100 दासी सेविका, नौकरानी, परिचारिका, भूत्या, दाई, धाय
101 धनुष कमान, धनु, शरासन, कार्मुक, चाप, कोदंड
102 नजर दृष्टि, निगाह, निगरानी, देख
103 नदी सरिता, तटिनी, आपगा, निम्नगा, निर्झरणी, कूलंकषा, तरॉगिनी, जलमाला, नद, प्रवाहिनी, सरित्, द्वीपवती, शैवालिनी
104 निंदा घुड़की, झिड़की, डांट. ताड़ना, फटकार, बुराई, भर्त्सना, आलोचना
105 नौका जलयान, डोंगी, तरणी, तरी, नाव, पोत, बेड़ा, किस्ती, पतंग
106 नरक यमपुर, यमालय, यमशाला, यमपुरी, जहन्नुम, नर्क, दुर्गत
113 दु:ख पीड़ा, व्यथा, कष्ट, संकट, शोक, क्लेश, वेदना, यातना, यंत्रणा, खेद, उत्पीडन, विषाद, संताप, क्षोभ

 

 

114 दासी सेविका, नौकरानी, परिचारिका, विद्या
115 नदी सरिता, तटिनी, आपगा, निम्नगा, निर्झरिणी, कुलंकषा, तरंगिनी, जलमाला, नद, प्रवाहिनी, सरित, द्वीपवती, शैवालिनी
116 नया नूतन, नव, नवीन, नव्य।
117 नींद निद्रा, शयन, सोना, स्वप्न, संवेश
118 पंडित सुधी, विद्वान, कोविद्, कवि, बुध, धीर, सूरि, मनीषी, प्राज्ञ, विज्ञ, विलक्षण!
119 पति भर्ता, वल्लभ, स्वामी, आर्यपुत्र, बालम, आर्य, ईश, अधिपति, दूल्हा, भर्तार, जीवनसाथी, सहचर, सुहाग, शौहर, खाविंद, हमसफर, हमराही, साजन
120 पत्नी भार्या, स्त्री, दारा, गृहिणी, बहू, वधू, कलत्र, प्राणप्रिया, औरत, अद्धगिनी, गृहलक्ष्मी, जीवनसंगिनी, सहचरी, प्राणेश्वरी, गृहस्वामिनी, बीबी, बेगम
121 पत्थर पाषाण, अश्म, प्रस्तर, उपल, पाहन, संग
122 पर्वत भूधर, शैल, अचल, महीधर, गिरि, भूमिधर, पहाड़, धरणीधर, नग, मेरु, शिखर, नाग, अद्रि, तुंग।
123 पार्वती उमा, गौरी, जगदम्बा, भवानी, अंबिका, आर्या, दुर्गा, गिरिजा, हिमाचलसुता, अभया, ईश्वरी, कुमारी, गिरितनया, रूद्राणी, शैलजा, शैलपुत्री, शैलसुता, सती, सर्वमंगला, शिवानी, पतिव्रता, त्रिनेत्रा, शूलधारिणी, भगवती।।
124 पुत्र तनय, सुत, सूनु, बेटा, लड़का, आत्मज, पूत, नंदन, कुमार।
125 पुत्री तनया, सुता, सूनू, बेटी, लड़की, आत्मजा, दुहिता, तनुजा, कन्या, नंदिनी, दुख्तर, धीया, बिटिया
126 पृथ्वी धरती, धरा, क्षिति, भूमि, मही, धरणी, वसुधा, वसुंधरा, भू, इला, उर्वी, धरित्री
127 पुष्प फूल, सुमन, कुसुम, प्रसून, सारंग
128 प्रकाश चमक, प्रभा, आभा, छवि, ज्योति, रुचि, रोशनी
129 पुरुष आदमी, जन, नर, मर्त्य, मर्द, मनुज, मानव, मनुष्य, मानुष, आदमजाद, मनई।
130 पवन अनिल, गंधवह, जगत्प्राण, पवमान, प्रभंजन, प्रवात, जौन, मारुत, वात, वायु, समीर, समीरण, हवा, आशुग, पृषदश्व, मातरिश्वा, श्वसन, स्पर्थन।
131 पानी अप, अमृत, अंबु, अंभ, उदक, कबंध, क्षीर, धनरस, जल, जीवन, तोय, तीर, पयस्, पाप, पानीय, भुवन, मेघपुष्प, वन, बाहि, शंबर, सलिल, सारंग, अर्ण।
132 बराबर समान, तुल्य, सदृश, सम, समरूप, समतल, हसबार, समकक्ष, लगातार, सद, तक, साथ, पास।
133 बाण –तीर, सर, विशिख, आशुग, नाराचा
134 बराबरी समानता, प्रतिस्पर्धा, समकक्षता, समरूपता, तुल्यता, समता, सदृशता, एकरूपता, तुल्यता, समता, एकरूपता
135 बंदर कपि, शाखामृग, वानर, मर्कट, हरि, लंगूर, हनुमान।
136 बिजली चंचला, चपला, विद्युत्, दामिनी, तडित, क्षणप्रभा, घनप्रिया, घनवल्लभ घनवामा, बीजुरी, सौदामिनी
137 ब्रह्मा चतुरानन, पितामह, लोकेश, आत्मभू, स्वयंभू, विधि, विधाता, हिरण्यगर्भ, प्रजापति, सृष्टिकर्ता, अज, अंडज, अब्जयोनि, कर्तार, सदानंद, सुरज्येष्ठ, नाभिजन्य।
138 वृक्ष पेड़, गाछ, विटप, तरु, अगम, पादप, द्रुम, महीरूह, विटपी, शाखी, कुट ।
139 बादल (मेघ) जलद, अभ्र, अंबुद, जलधर, जीमूत, जगज्जीवन, धराधर, नीरद, पयोद, बलाहक, मेघ, वारिद, वारिधर, वारिवाद, तडित्वान्।
140 भय विभीषिका, भीति, डर, आतंक, त्रास, भी, साध्वस
141 मछली मत्स्य, झख, मीन, जलजीवन, सफरी, शफरी, झष, जलजीव।
142 महादेव (महेश) शंभु, ईश, शव, शिव, शंकर, चंद्रशेखर, गिरीश, हर, नीलकंठ, भूतनाथ, वैद्यनाथ, विश्वनाथ, पशुपति, कपर्दिन, महेश्वर, देवाधिदेव, भव, भूतेश, त्रिलोचन, डमरूधर, उमाकांत, उमानाथ, कामरिपु, कामारि, कैलाशपति, गंगाधर, गिरिजापति, गिरिजानाथ, गौरीपति, चंद्रचूड, त्र्यंबक, धूर्जटी, नीलकंठ, पिनाकी, भव, अंधकरिपु, कपर्दी, ऋतुध्वंसी, कृत्तिवास, गिरिजाकांत, मदनारि, मृत्युंजय, रूद्र, व्योमकेश, वृषभध्वज, वामदेव, विरूपाक्ष, शर्व, श्रीकंठ, शितिकंठ, शूली, स्मरहर, मृड, त्रिशूलधारी।
143 महान् बड़ा, ऊँचा, महत्, उन्नत, विशाल, विशद्, बड़ा भारी।
144 मिठास माधुर्य, मधुरता, मीठापन, मिठाई
145 मुनि यती, अवधूत, संन्यासी, वैरागी, तापस, संत, भिक्षु, महात्मा, साधु, मुक्तपुरुष, तपस्वी।
146 मुश्किल कठिन, कड़ा, दुष्कर, दिक्कत, कठिनता, विपत्ति, मुसीबत, आफत, कठिनाई, परेशानी, कष्टसाध्य, क्लिष्ट, संकट।
147 मधुकर अलि, चंचरीक, द्विरेफ, मधुप, मिलिंद, भंवरा, मूंग, भ्रमर, भौंरा, षट्पद, शिलीमुख।
148 माता अम्मा, अंब, अंबा, जननी, मैया, माँ, धात्री, प्रसू, माई, मातृ, महतारी, जन्मदात्री।
149 मित्र तात, प्रिय, मीत, सृहृद, स्नेही, हितू, हितैषी, दोस्त, सखा, सहचर, मितवा, हमजोली, हमदम, हमराह, हमसफर, हमदर्द
150 मोक्ष मुक्ति, कैवल्य, निर्वाण, अपवर्ग, परमपद
151 मृत्यु (मौत) अवपात, इंतकाल, काशीवास, गंगालाभ, गंगावास, देहान्त, देहावसान, निधन, निर्वाण, मरण, मुक्तिलाभ, मौत, स्वर्गवास, प्राण-त्याग, प्राणांत, देहत्याग, परलोकवास, सद्गति।
152 यमुना सूर्यसुता, सूर्यतनथा, कालिंदी, अर्कजा, कृष्णा, जमुना, तरणितनुजा, रवितनया, रविनंदिनी, रविसुता।
153 यम सूर्यपुत्र, कृतांत, धर्मराज, काल, दंडधर, जीवनपति, मृत्युदाता, मृत्युदेवता, यमराज।
154 रमा कमला, पद्मा, पद्मासना, लक्ष्मी, इंदिरा, श्री, विष्णुप्रिया, कमलासना, हरिप्रिया।
155 राक्षस निशाचर, दानव, दितिसुत, दैत्य, असुर, सुरारी, खेचर, देवारि, दनुज।
156 रोशनी प्रकाश, उजाला, चिराग, दीया, दीप, दीपक, आभा, भास, चमक, कांति, मयूख ।
157 राजा नृप, भूप, महीप, महीपति, नरपति, नरेश, भूपति, राव, सम्राट, क्षितीश, अवनीश, देव, नृपति, नरेन्द्र, महिपाल, क्षोणिपति, क्षमाभुक् ।
158 रात्रि शर्वरी, निशा, रात, रैन, रजनी, यामिनी, त्रियामा, विभावरी, क्षणदा, कुहू, तपस्विनी, तमिस्रा, तमी, निशीथिनी, राका।।
159 राम रघुनाथ, अमिताभ, दशरथनंदन, कौशल्यानंदन, जानकीपति, सीतापति, सौमित्रमोहन, रघुवंशमणि, अयोध्यापति, कोशलपति।
160 लगातार सतत, अनवरत, अश्रांत, अविरत, नित्य, अविराम।
161 वसंत कुसुमाकर, ऋतुराज, पिकानंद, पुष्पसमय, बहार, मधु, मधुकाल, मधुऋतु, माधव।
162 विष्णु अच्युत, उपेंद्र, कमलाकांत, केशव, कैटभारि, गरुडध्वज, गोविंद, चक्रपाणि, चतुर्भुज, जनार्दन, शेषशायी, जलशायी, दामोदर, देवकीनंदन, नारायण, पीतांबर, पुरुषोत्तम, माधव, मधुसूदन, मुकुंद, रमाकांत, रमेश, लक्ष्मीकांत, लक्ष्मीपति, वनमाली, विश्वंभर, विश्वरूप, श्रीपति, श्रीवत्सल, हृषीकेश, कमलापति, विभु, जगदीश।
163 सब समस्त, सर्व, अखिल, निखिल, समग्र, सकल, पूर्ण, संपूर्ण
164 समूह झुड, वृंद, गण, टोली, मंडली, समुदाय, दल।
165 समुद्र सागर, रत्नाकर, जलधि, उदधि, पयोधि, वारिधि, पारावार, सिंधु, नदीश, नीरनिधि, अब्धि, तोयनिधि, सलिलेश, अकूपार, जलधाम।
166 सभा अधिवेशन, संगति, धर्मसभा, परिषद्, बैठक, महावर्तन, महासभा, संगमन, सत्संग, समागम, समुदाय, समिति, सम्मेलन, जमघट।
167 सरस्वती ब्राह्मी, भारती, वाक्, गिरा, वाणी, शारदा, वीणापाणि, वाग्देवी, वागीशा, पद्मासना, महाश्वेता, विधात्री, विद्यादेवी, ज्ञानदा, विद्यादायिनी, हंसवाहिनी
168 साफ स्वच्छ, निर्मल, उज्ज्वल, बेदाग, शुद्ध, पवित्र, खुला, आसान, स्पष्ट, निर्दोष
169 साँप (सर्प) अजगर, अहि, आशीविष, उरग, काकोदर, चक्षुःश्रवा, चक्री, पन्नग, जिह्यग, नाग, द्विजिह्व, पवनाशन, फणी, फणीश, विलेशय, भुजग, भुजंग, मणिधर, विषधर, सर्प, सरीसृप, सारंग, उरि, भोगी, व्याल
170 सुगंध, सुगंधि खुशबूदार, सुवास, खुशबू, गंधतृण, सुरभि, सौरभ, महक, चंदन, केसर, कस्तूरी
171 सूर्य (सूरज) अंशुमाली, अर्क, अरुण, आदित्य, कमलबंधु, कर, खग, गृहपति, छायापति, कायानाथ, तपन, तरणि, दिन, दिनकर, दिनमणि, दिनेश, दिवाकर, निदाघकर, पतंग, प्रभाकर, भानु, भास्कर, भास्वान्, मरीचिमाली, मार्तंड, मित्र, रवि, विभाकर, विरोचन, सविता, सहस्रांशु, सूर, हंस ।
172 सोना कंचन, कनक, कलधौत, कर्बुर, जातरूप, जांबूनद, तपनीय, महारजत, रुक्म, स्वर्ण, सुवर्ण, हारक, हिरण्य, हेम
173 स्वर्ग त्रिदशालय, त्रिदिव, त्रिविष्टप, दिव, देवलोक, नाक, स्वर, सुरलोक, स्वर्गलोक, बिहिश्त
174 सिंह शार्दूल, व्याघ्र, पंचमुख, मृगराज, मृगेंद्र, केशरी, केशी, महावीर, शेर।
175 सुंदर रुचिर, चारु, रम्य, सुहावना, मनोहर, मनहर, रमणीक, रमणीय, चित्ताकर्षक, ललित, मोहक, अनवद्य, मोहन
176 स्त्री अंगना, अबला, नारी, वनिता, महिला, ललना, कांता, रमणी, कामिनी, सुंदरी, औरत, वामा, भामा।
177 हनुमान अंजनीपुत्र, अंजनीलाल, आंजनेय, कपीश्वर, केशरीनंदन, पवनसुत, पवनकुमार, अजरंगबली, बजरंगी, मारुति, मारुतेय, मारुतनंदन, रामदूत, रामदास, कपीश, जितेंद्रिय
178 हवा वायु, मारुत, वात, बयार, समीर, पवन, अनिल।
179 हाथी गज, हस्ती, द्विप, कुंजर, वारण, नाग, करी, मतंग, कुंभी, द्विरद, गयंद, दंती, दंताबल, अनेकप, मतंगज, मातंग, वितुंड, सिंधूर
180 हृदय उर, छाती, वक्ष, वक्षस्थल, हिय, हिया
181 हाथ  हस्त, कर, बाहु, भुजा, दस्त, दाव, बाँह
182 लड़ाई युद्ध, समर, रण, संगर, आजि, अनीक, संयुग, आहव, संग्राम
183 शोभा काति, द्युति, छवि, सौंदर्य
184 मुख (मुँह) वदन, आनन, तुंड, चेहरा
185 मूर्ख अज्ञ, अज्ञानी, अबोध, बेवकूफ, जड़, मंदबुद्धि
186 मल्लाह केवट, कैवर्त, दाश, धीवर, दास
187 मेंढक दादुर, मंडूक, भेक, बेंग, वर्षाभू, शालूर
188 भोर मयूर, शिखी, मेहप्रिय, मेहनर्तक, मेहावृत्तक, राष्ट्रीय पक्षी, बर्हिण
189 समाचार खबर, वार्ता, प्रवृत्ति, वृत्तांत, उदांत, हाल-चाल
190 संदेह संशय, शंका, वहम, भ्रांति, द्वापर, विचिकित्सा
191 शीघ्र तुरत, तुरंत, द्रुत, सत्वर, चपल, आशु, जल्दी, त्वरित
192 छिपना प्रच्छन्, तिरोधान, अंतर्धान, अपवारण, अपिधान, अप्रकट, गायब
193 कछुआ कूर्म, कच्छप, कमठ
194 कौआ काक, काग, कागा, वायस, जयंत, एकाक्षी, एकाक्ष, कौवा
195 किसान खेतिहर, कृषक, काश्तकार, जोतदार, चासा, कृषिकार, कृषिजीवी, कृषिक, कृषिकर्मी, हलजीवी, हलवाह

सर्वनाम | Sarvanam in Hindi Grammar

सर्वनाम की परिभाषा:

जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त किए जाते हैं, वे सर्वनाम (Sarvnam) कहलाते हैं।

सर्वनाम सभी संज्ञा शब्दों के स्थान पर प्रयोग होने वाले वे शब्द हैं, जो भाषा को संक्षिप्त एवं रचना की दृष्टि से सुंदर बनाने में सहायक होते हैं।

“पूजा ने कहा कि पूजा कल विद्यालय नहीं जाएगी, क्योंकि पूजा को दिल्ली जाना है। पूजा पूजा की नानी जी को देखने दिल्ली जा रही है। पूजा की नानी जी बीमार हैं।”

उपर्युक्त पंक्तियों में “पूजा” नाम बार-बार आने से भाषा सटीक नहीं लग रही है।
नाम की पुर्नावृति (repetition) से भाषा के प्रवाह में भी रुकावट उत्पन्न हो रही है।
हम इन वाक्यों को ऐसे भी लिख या बोल सकते हैं-
पूजा ने कहा कि वह कल विद्यालय नहीं जाएगी, क्योंकि उसे दिल्ली जाना है।
वह अपनी नानी जी को देखने दिल्ली जा रही है।
उसकी नानी जी बीमार हैं।
इस बार पूजा नाम की आवृत्ति से बचने के लिए पूजा के स्थान पर वह, उसे, अपनी शब्दों का प्रयोग किया है। ये शब्द सर्वनाम कहलाते हैं।

सर्वनाम शब्द दो शब्दों के योग से बना है – सर्व + नाम।
सर्व का अर्थ है-सबका अर्थात् जो शब्द सबके नाम के स्थान पर प्रयोग किए जाते हैं, उन्हें सर्वनाम कहते हैं।

मैं
तू
तुम
आप
हम
यह
वह
जो
कोई
कुछ
क्या, आदि सर्वनाम हैं।

सर्वनाम सभी प्रकार की संज्ञाओं (नामों) के स्थान पर प्रयोग किए जाते हैं। अत: संज्ञा के समान ही विकारी शब्द होने के कारण इनमें भी कारक के कारण विकार या परिवर्तन आता है-जैसे- तू, तुमको, तुझको, तुझे, तेरा, तेरे लिए, तुझमें, आदि।

संज्ञा के समान ही सर्वनाम के भी दो वचन होते हैं-
(क) एकवचन ; जैसे-मैं, तू, यह, वह, आदि।
(ख) बहुवचन ; जैसे-हम, तुम, ये, वे, आदि।

सर्वनाम शब्द दोनों लिंगों में एक जैसे ही रहते हैं; जैसे-
मैं, तू, तुम, आप, आदि तथा लिंग-संबंधी जो प्रभाव वाक्य में दिखाई देता है, वह क्रिया-पदों से स्पष्ट होता है;
जैसे-(क) वह जाता है। (ख) वह जाती है।

सर्वनाम के निम्नलिखित छह भेद हैं

1.    पुरुषवाचक सर्वनाम (Purush Vachak Sarvnam)
2.    निश्चयवाचक सर्वनाम (Nishchay Vachak Sarvnam)
3.    अनिश्चयवाचक सर्वनाम (Anishchay Vachak Sarvnam)
4.    प्रश्नवाचक सर्वनाम (Prashan Vachak Sarvnam)
5.    सम्बन्धवाचक सर्वनाम (Sambandh Vachak Sarvnam)
6.    निजवाचक सर्वनाम (Nij Vachak Sarvnam)

 

सर्वनाम के भेद (Sarvanam Ke Bhed)

श्रेष्ठ – भाववाचक संज्ञा (Shreshth – Bhav Vachak Sangya)

श्रेष्ठता
भाववाचक संज्ञा के और उदहारण यहाँ देखें.