Bahuvrihi Samas Definition & Example (बहुव्रीहि समास)

बहुव्रीहि समास- (Bahuvrihi Samas) – जिस समास में कोई भी पद प्रधान नहीं होता, अपितु बाहर से ही आकर कोई शब्द प्रधान हो जाता है, बहुव्रीहि समास कहलाता है । जैसे-

पंकज, लंबोदर, दशांनन, इत्यादि । इन सामासिक शब्दों के खंड करने पर किसी विशिष्ट अर्थ का बोध होता है ।

बहुव्रीहि समास की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-
(क) यह समास दो या दो से अधिक पदों का होता है ।
(ख) इसके पदों के अर्थ से अलग अर्थ प्रधान होता है ।
(ग) इसका विग्रह शब्दों या पदों में न होकर वाक्यों में होता है।
(घ) इसका पहला पद प्रायें: कर्ताकारक होता है अथवा विशेषेण
(ङ) इस समास से बने पद विशेषण होते हैं । इसलिए इनका लिंग विशेष्ये के अनुरूप होता है ।

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